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माजुली की पारंपरिक कलाओं को जीआई टैग

माजुली की पारंपरिक कलाओं को जीआई टैग
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माजुली की पारंपरिक कलाओं को जीआई टैग

पहलूविवरण
घटनामाजुली को दो भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिले हैं
स्थानमाजुली, विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप
टैग प्राप्त उत्पादमाजुली मास्क बनाने की कला और माजुली पांडुलिपि चित्रकला
जीआई टैग का उद्देश्यकिसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से संबंधित अद्वितीय गुणों वाले उत्पादों की पहचान करना
माजुली मास्क बनाने की कला- 16वीं शताब्दी में इसकी शुरुआत हुई
- नव-वैष्णव परंपरा के भाओना में इसका उपयोग होता है
- इसमें देवी-देवताओं, राक्षसों, जानवरों और पक्षियों को दर्शाया जाता है
- बांस, मिट्टी, गोबर, कपड़े, सूती और लकड़ी से बनाए जाते हैं
- पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़कर इसे आधुनिक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं
माजुली पांडुलिपि चित्रकला- 16वीं शताब्दी में इसकी शुरुआत हुई
- सांची पट (अगर के पेड़ की छाल) पर घर में बनी स्याही से की जाती है
- शुरुआती उदाहरण: श्रीमंत शंकरदेव द्वारा भागवत पुराण का चित्रण
- अहोम राजाओं द्वारा संरक्षित
- माजुली के सत्त्र (मठों) में इसका अभ्यास किया जाता है
महत्वअसम की नव-वैष्णव संस्कृति से जुड़ी पारंपरिक कलाओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करना

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